eye injury

आँखों में चोट लगना :- आँखों में आघात या चोट लगना अत्यंत खतरनाक होता है। आँखों में सांद्र द्रव के बाहर निकल आने से लेंस के बदलने की समस्या एवं संक्रमण की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है। आँखों में चोट लगने पर हाथों द्वारा बार - बार छूने से संक्रमण का बहुत ज्यादा खतरा होता है। अतः बार - बार छूने से बचना अत्यंत आवश्यक होता है। साथ ही आँखों के आसपास की जगह की कोशिका भी क्षतिग्रस्त होकर आँखों को क्षतिग्रस्त कर सकती है। आँखों के चोट को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और उचित चिकित्सकीय सहायता लेना चाहिए ताकि आँखों जैसे संवेदनशील अंगों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हो और आँखों की रोशनी या देखने की क्षमता में कमी आ जाने की सम्भावना हो सकती है। 

लक्षण :- आँखों में दर्द,आँखों का लाल हो जाना,आँखों का न खुलना,खून निकलना,पुतली का फ़ैल जाना,घाव,चुभन होना,आँखों में सूजन,आँखों से पानी गिरना,आँखों को खोलने में परेशानी, धुंधला दिखाई देना आदि आँखों में चोट लगने के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - दुर्घटना,आँखों से किसी सख्त चीज का टकराना,आकस्मिक कोई धातु आँख में गिरना,रासायनिक पदार्थ का आँखों में जाना,कीड़े - मकोड़े का आँखों में जाना आदि। 

उपचार : - (1) एलोवेरा जेल एवं उसमें एक चम्मच हल्दी मिलाकर आँखों के ऊपर लेप करने और पट्टी बांधने से आँखों के चोट में बहुत लाभ करता है। 

(2) आँखों पर आलू या टमाटर की स्लाइस का इस्तेमाल आँखों की चोट में अत्यंत लाभकारी होता है। 

(3) चुकुन्दर स्वरस एवं गाजर स्वरस को मिलाकर उसमें थोड़ा सा शहद डालकर पीने से आँखों के चोट में बहुत लाभप्रद होता है। 

(4) अदरक स्वरस में शहद मिलाकर पीने से भी आँखों के चोट में बहुत लाभ पहुँचाता है। 

(5) हल्दी,दारू हल्दी,अम्बा हल्दी को पीसकर चूर्ण बनाकर गुनगुने दूध में मिलाकर पीने से आँखों के चोट में अत्यंत लाभ पहुँचाता है। 

 


chalazion disease

नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार रोग : - नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार आँखों की एक आम बीमारी है,जिसमें पालक की अश्रु ग्रंथि धीरे - धीरे बढ़ जाती है और उनमें सूजन एवं जलन वाली गांठ बन जाती है। प्रारम्भ में कलेजीयन पालक में छोटे दाने की तरह होते हैं और कुछ ही दिनों में बड़ा,लाल एवं रबड़ जैसा हो जाता है किन्तु यह दर्द रहित होता है। वास्तव में कलेजीयन के कुछ मामलों में उपचार की आवश्यकता नहीं होती है,किन्तु लम्बे समय तक रहने पर इलाज की आवश्यकता होती है। 

लक्षण : - पालक का भारीपन,पलक पर दर्द रहित सूजन,धुंधली दृष्टि,आँखों में खुजली आदि नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - कंप्यूटर में लम्बे समय तक काम करना,पालक के किनारे मेइबोमियन ग्रंथि का अवरुद्ध होना, विषाणु संक्रमण आदि नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) एक सूती कपड़े को गर्म पानी में डुबाकर निचोड़कर पलकों पर सेंक लगाने से नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार रोग ठीक हो जाता है। 

(2) ग्रीन टी को गर्म पानी में डिप करके अतिरिक्त पानी को निचोड़कर बंद आँखों पर रखने से नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार रोग ठीक हो जाता है। 

(3) आम के पत्ते को डाली से तोड़ने पर जो रस निकलता है उसे बंद आँखों पर लगाने से नेत्र वर्त्मग्रन्थि विकार ठीक हो जाता है। 

(4) अजवाइन के रस को बंद आँखों पर लगाने से वर्त्मग्रंथि विकार ठीक हो जाता है। 

(5) आलू को पीसकर बंद आँखों पर लेप करने से वर्त्मग्रंथि विकार दूर हो जाता है। 

(6) हरीतकी को पानी के साथ घिसकर बंद आँखों पर लगाने से वर्त्मग्रंथि विकार ठीक हो जाता है। 

(7) पत्थरचट्टा के पत्ते को पीसकर बंद आँखों पर लेप करने से वर्त्मग्रंथि विकार ठीक हो जाता है। 


stye disease

अंजनहारी,बिलनी या गुहेरी रोग :- अंजनहारी,बिलनी या गुहेरी रोग आँखों का एक अत्यंत कष्टकारक रोग है,जो आँखों की पलकों के किनारे लाल,दर्दयुक्त गांठ,फोड़े के रूप में दिखाई देती है। यह कोई रोग नहीं है किन्तु बहुत कष्टकारी होती है। अंजनहारी होने के मुख्य कारण विटामिन ए एवं डी की कमी और कब्ज के कारण भी होती है। वास्तव में यह संक्रमण के कारण फैलती है। 

लक्षण :- आँखें लाल होना,पलक का लाल होना,आँखों पर सूजन आना,पलक पर गांठ मवाद भरे हुए,पलक दर्द,आँखों में जलन एवं खुजली आदि अंजनहारी,बिलनी या गुहेरी रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण :- विटामिन ए एवं डी की कमी,संक्रमण,कब्ज,प्रदूषित हवा,धूल,मिट्टी आदि अंजनहारी,बिलनी या गुहेरी रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार :- (1) लौंग को पानी के साथ घिसकर अंजनहारी पर लेप करने से ठीक हो जाता है। 

(2) कैस्टर ऑयल को रुई में लगाकर अंजनहारी पर लगाने से ठीक हो जाता है। 

(3) अमरुद के पत्ते को पानी से धोकर गर्म कपड़े में रखें एवं ठंडा होने पर अंजनहारी पर लगाने से ठीक हो जाता है। 

(4) ग्रीन टी को गर्म पानी में डिप करके निचोड़कर आँखों को बंद करके रखने पर कुछ ही दिनों में अंजनहारी ठीक हो जाता है। 

(5) आम के पत्तों को डाली से तोड़ने पर जो रस निकलता है उसे अंजनहारी पर लगाने से ठीक हो जाता है। 

(6) इमली के बीज के ऊपर का छिलका हटाकर पानी के साथ घिसकर अंजनहारी पर लगाने से ठीक हो जाता है। 

(7) अजवाइन के रस को पानी में घोलकर उस पानी से अंजनहारी या गुहेरी को धोने से ठीक हो जाता है। 

(8) हरीतकी को पानी के साथ घिसकर लगाने से अंजनहारी या गुहेरी ठीक हो जाती है। 

(9) तुलसी के रस में लौंग घिसकर लगाने से अंजनहारी ठीक हो जाता है। 

(10) पत्थर चट्टा के पत्ते का रस अंजनहारी या गुहेरी पर लगाने से बहुत जल्दी ठीक हो जाता है। 


blurred vision disease

धुंधली दृष्टि रोग : - धुंधला दिखाई देना आँखों की एक आम समस्या है ,किन्तु गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। धुंधला दिखना निकट दृष्टि दोष,दूर दृष्टि दोष,दृष्टि वैषम्य,मोतिया बाँध आदि विकारों के कारण भी हो सकता है,जो सुधारात्मक लेंस या जीवन शैली में बदलाव के माध्यम से सुगमतापूर्वक दूर किया जा सकता है या यूँ कहें कि निराकरण संभव है। आज के परिवेश में प्रदूषित वातावरण,प्रदूषित खाद्य पदार्थों के सेवन एवं फ़ास्ट फ़ूड के उपयोग से छोटे - छोटे बच्चे भी इसके शिकार हो रहे हैं जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है। आज बच्चे एवं युवा के साथ - साथ बुजुर्ग भी मोबाईल यंत्र का अत्यधिक प्रयोग करते हैं और मोबाइल पर कुछ न कुछ करते रहते हैं जिसका प्रभाव आँखों पर पड़ना स्वाभाविक है। इन सब कारणों से मस्तिष्क की कमजोरी,पाचन विकार,असंतुलित खाद्य पदार्थ,विटामिन ए की कमी आदि के कारण भी धुंधली दृष्टि या धुंधला दिखाई देना एक प्रमुख कारण है। 

लक्षण :- आँखों में धीमा दर्द,हल्की धुंधली दृष्टि,सोने या आराम करने से कम हो जाना,अधिक आंसू आना,प्रकाश के चारों ओर घेरा दिखाई देना,सिरदर्द,जी मिचलाना,उल्टी होना,पलकों पर सूजन होना आदि धुंधली दृष्टि रोग के प्रमुख कारण हैं। 

कारण :- मधुमेह,उच्च रक्तचाप,कम रौशनी में कार्य करना,अँधेरे कमरे में टीवी देखना,कम रश्मि में पढ़ना,धूम्रपान,अधिक शराब का सेवन,हरी पत्तियों वाली सब्जियां नहीं खाना,कंप्यूटर पर काम करना,तनाव आदि धुंधली दृष्टि रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार :- (1) शुद्ध शहद की एक या दो बूंदें प्रतिदिन डालने से धुंधली दृष्टि रोग ठीक हो जाता हैं। 

(2) सोंफ एवं धनिया समान भाग लेकर कूट पीस कर और उसमें बराबर मात्रा मिश्री मिलाकर प्रतिदिन पांच ग्राम की मात्रा सुबह - शाम सेवन करने से धुंधली दृष्टि रोग ठीक हो जाता हैं। 

(3) चुकुन्दर एवं गाजर को टुकड़े - टुकड़े कर एक गिलास जल में धीमी आंच पर उबालें और आधा शेष रहने पर छानकर सुबह - शाम पीने से धुंधली दृष्टि रोग दूर हो जाता हैं। 

(4) दूध में बादाम को भिंगों कर रात भर रखें और सुबह खाने से धुंधली दृष्टि रोग दूर हो जाता हैं। 

(5) इलायची के दो - तीन छोटे -छोटे टुकड़े को दूध में पीसकर उबालें और सोते समय पीने से धुंधली दृष्टि रोग दूर हो जाता हैं। 

(6) ब्लू बेरी के सेवन से धुंधली दृष्टि रोग दूर हो जाता हैं। 

(7) एक चम्मच मुलेठी पाउडर को एक कप गर्म दूध में डालें और उसमें एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से धुंधली दृष्टि रोग दूर हो जाता हैं।

(8) सोंफ,सफ़ेद मिर्च और बादाम समान भाग लेकर महीन पीसकर चूर्ण बनाकर उसमें समान भाग मिश्री मिलाकर सुबह - शाम सेवन करने से धुंधली दृष्टि रोग दूर हो जाता हैं। 


eye inflammation disease

नेत्र सूजन रोग : - नेत्र सूजन एक आम बीमारी है ,जो अधिकांशतः एलर्जी,कंजक्टिवाइटिस एवं ब्लेफेराइटिस के कारण होता है। नेत्र सूजन रोग में पलकों के आसपास ऊतकों में सूजन वायरस या बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण मुख्य रूप से होता है। नेत्र सूजन होने पर अत्यंत कष्टप्रद स्थितियों का सामना करना पड़ता है ,जिसका उपचार नहीं कराने पर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो जाना स्वाभाविक है।वास्तव में नेत्र सूजन में आँखों की ऊतकों का सूजन एवं उसका क्षय होना शुरू हो जाता है जो पलकों में भी सूजन की स्थिति का आ जाना स्वाभाविक है। 

लक्षण :- आँखों एवं पलकों में सूजन आ जाना,आँखों में पीड़ा,खुजली,लालिमापन,रौशनी के प्रति संवेदनशीलता,देखने में परेशानी,आँखों में दर्द,दृष्टि में धुंधलापन,आँखों से पानी आना, आदि नेत्र सूजन रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- एलर्जी,आँखों में संक्रमण,ब्लेफेराइटिस,कंजक्टिवाइटिस,आहार में सोडियम की अधिकता,आनुवंशिक कारण,प्रदूषण एवं गंदगी,कम सोना आदि नेत्र सूजन रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार :- (1) एलोवेरा जेल को एक साफ सूती कपडे में रखकर आँखों के सूजन वाले भाग पर कुछ देर रखने से सूजन कम होकर ठीक हो जाती हैं। 

(2) टी बैग्स को फ्रीज़ में रखकर ठंडा कर उसे निकालकर आँखों पर रखने से सूजन दूर हो जाती हैं। 

(3) एक चम्मच शहद में आंवले का रस मिलाकर दिन में दो बार पीने से आँखों की सूजन एवं संक्रमण ठीक हो जाती हैं। 

(4) बिलबेरी के सेवन से भी आँखों की सूजन दूर हो जाती हैं। 

(5) आलू की स्लाइस काटकर आँखों के सूजन पर कुछ देर रखने से ठीक हो जाती हैं। 

(6) खीरा को स्लाइस के रूप में काटकर 10 - 15 मिनट तक रखने से आँखों का सूजन ठीक हो जाता हैं। 

(7) गुलाब की 10 - 15 पँखुड़ियों को शहतूत की पत्तियों के साथ एक गिलास में डालकर कुछ देर रख दें और उसके बाद उसी पानी से आँखों को धोने से आँखों का सूजन दूर हो जाता हैं। 

(8) गुलाब जल की दो - तीन बूंदें प्रतिदिन सुबह दोपहर और शाम आँखों में डालने से नेत्र सूजन ठीक हो जाता हैं। 

(9)तुलसी के पत्तों को पानी में रात में डाल दें और सुबह उस पानी से आँखों को धोने से नेत्र सूजन में बहुत आराम मिलता हैं। 

(10) आंवला पाउडर एक गिलास जल में रात को भिगों दें और सुबह उसे छानकर आँखों को धोने से भी नेत्र सूजन ठीक हो जाता हैं। 


presbyopia disease

जरा दूरदृष्टितारोग : - जरा दूरदृष्टिता रोग आँखों की एक गंभीर समस्या है ,जो आयु में वृद्धि के साथ आँखों की सामंजस्य क्षमता में कमी आ जाने के कारण होती है। इस रोग से पीड़ित व्यक्ति अपने पास रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख पाने में असमर्थ रहता है यानि स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। वास्तव में जरा दूरदृष्टिता से पीड़ित व्यक्ति के आँखों में स्थित पक्ष्माभी पेशियों का समय के कालक्रम के साथ धीरे - धीरे कमजोर हो जाना इस बीमारी का मुख्य कारण है। पक्ष्माभी पेशियों में कमजोरी आ जाने से पीड़ित व्यक्ति के नेत्र का निकट बिंदु दूर हट जाता है और आँखों की अभिनेत्र लेंस की जो सामंजस्य क्षमता होती है उसमें कमी आ जाती है। परिणामस्वरूप जरा दूरदृष्टिता रोग से ग्रस्त व्यक्ति पास की वस्तु को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाता है। 

लक्षण : - नेत्र के लेंस में कठोरता का आ जाना, दूर एवं पास की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख नहीं पाना,धुंधला दिखाई देना आदि जरा दूरदृष्टिता रोग के प्रमुख कारण हैं। 

कारण : - उम्र में वृद्धि,मांसपेशियों का कमजोर हो जाना,नेत्र के लेंस का लचीलापन कम हो जाना आदि जरा दूरदृष्टिता रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) काली मिर्च चूर्ण घी एवं बूरा के साथ प्रतिदिन सेवन करने से जरा दूरदृष्टिता रोग दूर हो जाता है। 

(2) गाजर के जूस में नीम्बू का रस मिलाकर प्रतिदिन पीने से जरा दूरदृष्टिता रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 

(3) धनिया का रस निकालकर प्रतिदिन सुबह - शाम आँखों में एक - दो बून्द डालकर कुछ देर आँखों को बंद रखने से जरा दूरदृष्टिता रोग दूर हो जाता है।

(4) आंवला जूस प्रतिदिन घर में निकालकर उसमें एक चम्मच शहद डालकर सेवन करने से जरा दूरदृष्टिता रोग ठीक हो जाता है। 

(5) सोंफ,बादाम गिरी और मिश्री समान भाग लेकर कूट पीस कर चूर्ण बना लें और प्रतिदिन सुबह शाम दो चम्मच 250 मिलीलीटर गुनगुने  दूध  के साथ सेवन करने से जरा दूरदृष्टिता रोग ठीक हो जाता है। 

(6) सूखे मेवे का प्रतिदिन सेवन करने से भी जरा दूरदृष्टिता रोग दूर हो जाता है। 


eye cancer

आँखों का कैंसर रोग :- आँखों का कैंसर एक अत्यंत गंभीर एवं कष्टदायक रोग है,जो आँखों के भीतर शुरु होता है या शरीर के किसी अन्य अंगों से आँखों में फैलने के कारण होता है।स्तन कैंसर एवं फेफड़ों का कैंसर दो सबसे आम कैंसर है,जिससे आँखों में फैलता है।आँखों में ट्यूमर एक बहुत ही कष्टप्रदायक स्थिति होती है।द्विदृष्टिता का आ जाना एवं दूर दृष्टि कमजोर हो जाती है।आँखों के कैंसर के प्रकारों में अन्तः चाक्षुष ट्यूमर में उवेअल मेलेनोमा, ट्यूमर रंजित परितारिका एवं रोमक देह में होने वाला होता है।अन्तः चाक्षुष ट्यूमर सबसे आम घातक होता है।इसे रेटिनोब्लास्टोमा भी कहा जाता है।यह रेटिना की कोशिकाओं में शुरु होकर आँखों के अन्य भागों में फ़ैल जाता है।

लक्षण :- दृष्टि ह्रास,डबल दृष्टि,तिरछी दृष्टि,सफ़ेद या पीले रंग की चमक,आँखों में लालिमा,दर्द,आँख के केंद्र में सर्कल में परिवर्तन आदि आँखों के कैंसर के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- आनुवांशिक कारण,पराबैंगनी प्रकाश के संपर्क के कारण,बढ़ती उम्र,आँखों में आघात,कैंसर का अन्य अंगों से स्थानांतरण आदि आँखों के कैंसर के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) काली मिर्च को पीसकर चूर्ण बनाकर आधा चम्मच की मात्रा को घी एवं बूरा के साथ प्रतिदिन खाने से आँखों का कैंसर एक महीने में ही दूर हो जाता है।

(2) अदरक स्वरस ,गुलाब जल एवं शहद समान मात्रा लेकर मिलकर रख लें और प्रतिदिन एक - दो बूंदें आँखों में डालने से आँखों का कैंसर दूर हो जाता है।

(3) धनिया एक चम्मच जल में उबालें और प्रतिदिन एक -दो बूंदें आँखों में डालने से आँखों का कैंसर ठीक हो जाता है।

(4) नोनी फल के जूस का प्रतिदिन सुबह - शाम 15 - 20 एमएल सेवन करने से आँखों का कैंसर या अन्य किसी भी प्रकार का कैंसर भी ठीक हो जाता है।

(5) अंगूर के बीजों के चूर्ण का भी सेवन करने से आँखों का कैंसर ठीक हो जाता है।

(6) हल्दी पाउडर को गर्म जल में आधा चम्मच,आधा नीम्बू का रस एवं शहद मिलाकर प्रतिदिन सुबह - शाम सेवन करने से आँखों के कैंसर में बहुत लाभ मिलता है।


eye choroid disease

आँखों का रक्तक विकार रोग :- आँखों का रक्तक विकार रोग एक अत्यंत गंभीर रोग है,जिसके कारण आँखें लाल हो जाती है।आँखों में कोरॉयड कोशिकाएं होती हैं जो रेटिना को ऑक्सीजन एवं रक्त की आपूर्ति प्रदान कर रेटिना को ठंडा और गर्म रखता है।कोरॉयड की स्वस्थता पर ही आपकी आँखें और अच्छी दृष्टि कार्य करने के लिए पर्याप्त रक्त आपूर्ति पर भरोसा करती है।कोरॉयड में गहरे रंग के मेलेनिन वर्णक प्रकाश को अवशोषित करते हैं और आँखों के भीतर प्रतिबिम्ब सीमित करते हैं,जो दृष्टि को कम कर सकते हैं।जब मेलेनिन को प्रकाश विषाक्तता के खिलाफ कोरॉयड रक्त वाहिकाओं की रक्षा के लिए किये गए प्रयास के कारण आँखे लाल हो जाती हैं।

लक्षण :- आँखे लाल हो जाना,दृष्टि क्षीणता,आँखों में दर्द,सिर दर्द आदि आँखों के रक्तक विकार रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- कोरॉयड का संक्रमित हो जाना,कोरॉयड कोशिकाएं का क्षीण हो जाना आदि आँखों के रक्तक विकार रोग मुख्य कारण हैं।

उपचार :-  (1) आँखों में प्रतिदिन गुलाब जल डालने से आँखों का रक्तक विकार रोग दूर हो जाता है।

(2) शहद की दो - तीन बूंदें प्रतिदिन डालने से आँखों का रक्तक विकार दूर हो जाता है।

(3) चुकुन्दर,आंवला एवं गाजर के टुकड़े को एक गिलास जल में डालकर धीमी आंच पर उबालें और एक चौथाई शेष रहने पर छानकर पीने से आँखों का रक्तक विकार रोग दूर हो जाता है।

(4) पालक को उबालकर पीने से रक्तक विकार रोग दूर हो जाता है।

(5) गुलाब जल की दो - तीन बूंदें आँखों में डालने से रक्तक विकार रोग दूर हो जाता है।

(6) अदरक स्वरस,गुलाब जल एवं शहद समान भाग मिलाकर दो - तीन बूंदें आँखों में डालने से रक्तक विकार रोग दूर हो जाता है।


eye lens disease

आँखों का लेंस विकार रोग :- आँखों का लेंस विकार आँखों का एक गंभीर रोग है।आँखों का लेंस प्रकाश के अपवर्तन के सिद्धांतों पर काम करता है और वस्तु का वास्तविक अथवा काल्पनिक प्रतिबिम्ब बनाकर स्वच्छ छवि को दिखाता है।किन्तु जब लेंस में विकार आ जाता है तो तो प्रतिबिम्ब को रेटिना के आगे या पीछे दिखाने लगता है और प्रतिबिम्ब बनता है तो स्पष्ट दृष्टिगोचर नहीं हो पाता है।इसे ही आँखों का लेंस विकार रोग कहा जाता है।पीछे प्रतिबिम्ब बनने पर उत्तल लेंस और आगे बनने पर अवतल लेंस का चश्मा लगाकर इसे दूर किया जाता है,किन्तु आयुर्वेद में इसे ठीक किया जा सकता है।

लक्षण :- धुंधली दृष्टि,रात में कम दिखाई देना,एक आँख में दोहरी दृष्टि,आँख का रोग,प्रकाश की संवेदनशीलता,निकट दृष्टि दोष आदि आँखों का लेंस विकार रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

कारण :- आघात,उम्र का बढ़ना,आनुवांशिक विकार,विकिरण के संपर्क में,चर्मरोग,विटामिन सी की कमी,धूम्रपान,मधुमेह,मोटापा,उच्च रक्तचाप आदि आँखों का लेंस विकार रोग के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) काली मिर्च के चूर्ण को घी बूराके साथ मिलाकर पतिदिन खाने से लेंस विकार रोग दूर हो जाता है।

(2) चुकुन्दर,पालक,आंवला एवं गाजर के टुकड़े - टुकड़े करके दो गिलास जल में डालकर धीमी आंच पर उबालें और जब एक चौथाई शेष रहे तब छानकर प्रतिदिन सुबह - शाम पीने से लेंस विकार रोग ठीक हो जाता है।

(3) आंवला स्वरस,चुकुन्दर का रस एवं शहद समान भाग मिलाकर प्रतिदिन सुबह - शाम सेवन करने से लेंस विकार रोग दूर हो जाता है।

(4) अदरक स्वरस,गुलाब जल एवं शहद समान भाग मिलाकर एक - दो बून्द आँख में डालने से लेंस विकार रोग दूर हो जाता है।

(5) गुलाब जल की दो -तीन बूंदें आँखों में डालने से लेंस विकार रोग ठीक हो जाता है।


eye infection

आँखों का संक्रमण रोग :- आँखों में संक्रमण या इन्फेक्शन की समस्या अत्यंत कष्टप्रदायक होती है,जो विषाणु के कारण होता है। " रोहा " नामक विषाणु के कारण भारत में अंधापन की समस्या अधिकतर पाई जाती है। आँखों में इंफेक्शन बैक्टीरिया,फंगस या वाइरस की वजह से होता है,जिसमें आँखों में लालिमा,पानी आना,जलन होना,सिरदर्द,

दृष्टि में धुंधलापन आदि विशेष लक्षण दृष्टिगोचर होते हैं। यह अधिकतर बरसात ख़त्म होने के बाद भी वातावरण में मौजूद नमी,फंगस एवं मक्खियों की वजह से बैक्टीरिया का तेजी से पनपने के कारण होता है।

लक्षण :- आँखें लाल होना,आँखों में पानी आना,आँखों में जलन होना,सिरदर्द,वामन,दृष्टि का धुंधलापन,आँखों में दर्द आदि आँखों में संक्रमण या इंफेक्शन के प्रमुख कारण हैं।

कारण :- सुजाक,उपदंश,तपेदिक,क्षय रोग,चोट लगना आदि आँखों में संक्रमण या इन्फेक्शन के मुख्य कारण हैं।

उपचार :- (1) काली मिर्च को पीसकर घी बूरा के संग प्रतिदिन खाने से आँखों का संक्रमण रोग समाप्त हो जाताहै।

              (2) मिटटी के नए पात्र में पानी डालकर उसमें त्रिफला डाल दें और सबेरे आँखों को धोने से कुछ ही 

                    दिनों में आँखों का संक्रमण रोग ठीक हो जाता है।

              (3) आंवला चूर्ण पाँच ग्राम की मात्रा प्रतिदिन रात्रि में सोते समय सेवन करने से आँखों का संक्रमण रोग 

                    ठीक हो जाता है।

              (4) 50  ग्राम धनियां कूट कर पानी में उबालें और ठंडा करके कपड़े से छानकर शीशी में रख लें। 

                   प्रतिदिन दो-दो बूंदें आँखों में डालने से आँखों का संक्रमण रोग समाप्त हो जाता है।

              (5) हरड़,बहेड़ा और आंवला समान भाग लेकर चूर्ण बनाकर रख लें और प्रतिदिन दो से पाँच ग्राम की 

                    मात्रा को घी एवं मिश्री संग खाने से आँखों का संक्रमण रोग समाप्त हो जाता है।

              (6) प्रतिदिन आँखों में गुलाब जल की दो-दो बूंदें डालने से आँखों का संक्रमण या इन्फेक्शन ठीक हो 

                   जाता है।


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