numbness and tingling disease

हाथ - पैरों में सुन्नता रोग : - हाथ - पैरों में सुन्नता एक आम समस्या है,जिसमें स्पर्श करने पर स्पर्श का एहसास नहीं होता है। वास्तव में हाथ - पैरों में सुन्नता एक गंभीर बीमारी की सूचक भी हो सकती है। इसीलिये हाथ - पैरों में सुन्न पड़ने पर चिकित्सक से सलाह एवं उपचार करवाना आवश्यक है। हाथ - पैरों में सुन्नता का अनुभव लगभग अपने जीवन में कई बार करते हैं और इसे सामान्य सी बात समझ कर इग्नोर करते हैं,जिसका प्रभाव गंभीर समस्याओं के रूप में भुगतते हैं। 

लक्षण : - हाथ - पेअर सुन्न पड़ जाना,स्पर्श करने पर कुछ महसूस न होना,सुइयां चुभने जैसा एहसास,प्रभावित स्थान पर दर्द,ऐंठन,पैरों में भारीपन,हाथ - पैर उठाने में असहजता आदि हाथ - पैरों में सुन्नता के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - लगातार हाथ -पैरों में दवाब,ठंडी चीजों के संपर्क में अधिक देर तक रहना,स्नायुविक दुर्बलता,अत्यधिक शराब का सेवन,अत्यधिक धूम्रपान,मधुमेह,विटामिन्स की कमी,ऑक्सीजन की कमी आदि हाथ - पैरों में सुन्नता के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) सुन्नता वाली जगहों पर गरम पानी के सेंक द्वारा दूर हो जाता है। 

(2) सुन्नता वाली जगहों पर मसाज देने से भी खून का संचरण ठीक से होने से हाथ - पैरों की सुन्नता ठीक हो जाती है। 

(3) एक चम्मच हल्दी एक गिलास दूध में मिलाकर हल्के आंच पर गर्म करके पीने से हाथ - पैरों की सुन्नता में अत्यंत लाभ होता है। 

(4) एक चम्मच दालचीनी पाउडर शहद में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से हाथ - पैरों की सुन्नता में बहुत लाभ पहुँचाता है। 

(5) अपने दैनिक आहार में विटामिन बी,बी 6 एवं बी 12 के सेवन से भी हाथ - पैरों की सुन्नता दूर हो जाती है। 

(6) संतुलित आहार जैसे - अंडे,एवाकाडो,मांस,मछली,केला,बीन्स,ओटमील,दूध,दही,मेवे,फल आदि के सेवन से हाथ - पैरों की सुन्नता की समस्या में बहुत लाभ होता है। 

(7) सुन्नता वाले अंगों को ऊपर उठाने से भी सुन्नता दूर हो जाती है। 

(8) पोटेशियम ,मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से हाथ - पैरों की सुन्नता ठीक हो जाती हैं। 

(9) एक गिलास पानी में एक चम्मच हल्दी मिलाकर गरम करें और उसे पीने से हाथ - पैरों की सुन्नता दूर हो जाती है। 

(10) दालचीनी पाउडर एक गिलास पानी में उबाल कर पीने से हाथ - पैरों की सुन्नता दूर हो जाती है। 

(11) लहसुन,जीरा,लौंग,इलायची चूर्ण को पानी के साथ सेवन करने से हाथ - पैरों की सुन्नता दूर हो जाती है। 

योग,आसान एवं प्राणायाम : - अनुलोम - विलोम,कपालभाति,भ्रामरी,भस्त्रिका,सर्वांग आसन,तितली आसन आदि। 


vasculitis disease

वाहिका शोथ रोग : - वाहिका शोथ नाड़ी तंत्र का एक गंभीर रोग है,जिसमें खून की नसों में सूजन हो जाती है और इनकी परतों में बदलाव आ जाता है। वाहिका शोथ धमनियों,नसों एवं कोशिकाओं को प्रभावित कर रक्त संचरण यानि रक्त प्रवाह में बाधा या रुकावट पहुँचाती है। रक्त संचरण में बाधा आने पर धमनी विस्फार एवं अत्यंत खतरनाक रक्त स्राव का कारण बन सकती है जो अत्यंत परेशानी बन सकती है। वास्तव में वाहिका शोथ शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में गड़बड़ी उत्पन्न होने की वजह से रक्त वाहिकाओं को यानि खून संचरण होने वाली नसों को क्षतिग्रस्त करने लगती है जो वायरस या एलर्जिक संक्रमण के कारण होता है। कभी - कभी तो वाहिका शोथ यानि नसों में सूजन की वजह से शरीर के मुख्य अंगों जैसे - फेफड़े,मस्तिष्क या किडनी क्षतिग्रस्त या सुचारु रुप से अपना कार्य करने में समर्थ नहीं होती हैं जो जानलेवा साबित होती है। कहने का तात्पर्य कि वाहिका शोथ को कभी भी हलके में नहीं लेना चाहिए और समय रहते चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की गंभीर परेशानी से बचा जा सके। 

लक्षण : - बुखार,थकान,वजन घटना,मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द,सरदर्द,रात में पसीना आना,लाल चकत्ते,सुन्न होना,दुर्बलता,अंग में नाड़ी का नुक़सान,मुँह के छाले,जननांग अल्सर,आँखों में सूजन,त्वचा पर मुंहासे की तरह घाव,झुनझुनी,दमा,नसों में कठोरताआदि वाहिका शोथ रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - हेपेटाइटिस " बी " एवं " सी " का संक्रमण,रक्त कैंसर,संधि शोथ,आनुवंशिक कारण,बढ़ती उम्र,मधुमेह, वायरस का संक्रमण,एलर्जिक संक्रमण आदि वाहिका शोथ रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) हल्दी,दारु हल्दी,अम्बा हल्दी सामान भाग लेकर कूट पीस कपड़छान कर चूर्ण बनाकर एक चम्मच प्रतिदिन गुनगुने दूध में मिलाकर सेवन करने से वाहिका शोथ रोग दूर हो जाता है। 

(2) अदरक स्वरस,लहसुन स्वरस एवं शहद मिलकर प्रतिदिन सेवन करने से वाहिका शोथ दूर हो जाता है। 

(3) अश्वगंधा पाउडर का गुनगुने दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से वाहिका शोथ दूर हो जाता है। 

(4) बेकिंग सोडा एक चुटकी की मात्रा एक गिलास जल में डालकर पीने से धीरे - धीरे वाहिका शोथ समाप्त हो जाता है।   

(5) सोयाबीन दूध के साथ शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से वाहिका शोथ समाप्त हो जाता है। 

(6) चुकुन्दर,पालक एवं गाजर छोटे - छोटे टुकड़े करके दो गिलास जल में उबालें और जब एक चौथाई शेष रहे तो छानकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर सेवन करने से वाहिका शोथ में बहुत लाभप्रद है। 

(7) जौ का काढ़ा प्रतिदिन कुछ दिनों तक पीने से वाहिका शोथ में अत्यंत आश्चर्यजनक लाभ होता है। 

(8) अनानास के जूस के सेवन से भी वाहिका शोथ दूर हो जाता है |

योग एवं प्राणायाम : - अनुलोम - विलोम,कपालभाति,भ्रामरी,भस्त्रिका,उज्जयी |


arteriovenous malformation disease

दिमाग की उभरी नसों की बीमारी : - दिमाग की उभरी हुई नसों का रोग एक अत्यंत गंभीर स्थिति है ,जिसमें दिमाग की नसें एक गुच्छा के रूप में परिवर्तित हो जाती है। दिमाग की उभरी हुई नसों या गुच्छों का रोग जन्मजात होती है और उम्र के बदलाव के साथ - साथ बढ़ने लगती है और दिमाग में दबाव बढ़ने लगती है। फलस्वरूप रोगी के व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है यानि व्यवहार सामान्य नहीं रहता है। दिमाग में दबाव बढ़ने से रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है और कभी तो रक्तस्राव भी होने लगता है ,जिसे इंटरवेन्श पद्धति से गले के पास की नस से दिमाग की नसों का रक्तस्राव रोका जाता है ताकि दबाव पर नियंत्रण पाया जा सके। वास्तव में दिमाग की नसों का रक्तस्राव एक जानलेवा स्थिति है ,जिसका उपचार यथाशीघ्र कराना चाहिए। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में दिमाग की नसों या गुच्छों के रोग का उपचार अत्यंत निरापद एवं प्रामाणिक माना जाता है।

लक्षण :- सिरदर्द,देखने में दिक्कत,असामान्य व्यवहार,दिमाग में खून का स्राव होने से नाक से भी खून का आना,उल्टी,चक्कर आना,चेहरे की आकृति में परिवर्तन,आँखों के सामने अँधेरा छाना,बोलने में तुतलापन,अचानक कमजोरी,चेहरे के एक भाग में कमजोरी आना आदि दिमाग की उभरी नसों की बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं।  

कारण : - आनुवांशिक,खान - पान की आदतों का सही नहीं होना,मोटापा,पोषक तत्त्वों का अभाव,गलत गतिहीन जीवन शैली,दिमाग की नसों का संकरा हो जाना व्यायाम आदि का नहीं करना आदि दिमाग की उभरी नसों की बीमारी के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) अश्वगंधा पाउडर को दूध के साथ नियमित सेवन करने से दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत आराम मिलता है। 

(2) एक कप दूध में लहसुन की चार - पांच कलियों को उबालकर पीन से दिमाग की उभरी नसों का रोग ठीक हो जाता है। 

(3) प्रतिदिन दूध में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर सेवन करने से दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत फायदा होता है। 

(4) अनार के जूस के नियमित सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत लाभ मिलता है। 

(5) नियमित रूप से बादाम का सेवन भी दिमाग की उभरी नसों की बीमारी में बहुत फायदा होता है। 

(6) अखरोट गिरी के नियमित सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों में बहुत लाभ होता है। 

(7) दूध में दालचीनी,अर्जुन की छाल तुलसी के पत्ते एवं काली मिर्च डालकर चाय पीने से भी दिमाग की उभरी नसों के रोग में अत्यंत लाभ होता है। 

(8) शंखपुष्पी के सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों की बीमारी में अद्भुत लाभ होता है। 

(9) बच चूर्ण को ब्राह्मी के साथ सेवन करने से दिमाग की उभरी नसों के रोग में बहुत फायदा होता है। 

(10) जटामांसी के सेवन से भी दिमाग की उभरी नसों की बीमारी में अत्यंत आश्चर्यजनक लाभ मिलता है। 

(11) मण्डूकपर्णी के सेवन से दिमाग की उभरी नसों के रोग में अत्यंत लाभ पहुंचाता है। 

आसन,योग एवं प्राणायाम : - अनुलोम - विलोम,कपालभाति,भ्रामरी,भस्त्रिका,शीर्षासन,ॐ का उच्चारण आदि। 

 


varicose veins disease

वेरिकोज वेन्स रोग :- वेरिकोज वेन्स रोग एक अत्यंत कष्टप्रदाक रोग है ,जिसमें नसें एक जगह जमा हो जाती हैं। इस रोग में नसों में रक्त के दबाव के कारण उसका आकार बढ़ जाता है एवं नीले रंग का त्वचा के बाहर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। वेरिकोज वेन्स ज्यादातर पैरों की नसों में ही देखने को मिलता है ;किन्तु यह शरीर के अन्य भागों में भी हो सकता है। वास्तव में हृदय के वाल्व द्वारा रक्त का परिसंचरण भलीभांति प्रकार से नहीं करने के कारण नसों में रक्त का इकट्ठा होने से नसें फूल जाती हैं और ये नसें त्वचा के बाहर एक जगह जमा होकर नीले रंग में दिखने लगती है। इसे अपस्फीति शिरा रोग के भी नाम से जाना जाता है। 

 वेरिकोज वेन्स कई तरह के होते है - 

(1) मध्यम प्रकार :- इसमें त्वचा के नीचे बड़े उभार होते हैं जो नीले रंग के होते हैं। इसमें रक्त जमा हो जाता है जो दिल की ओर नहीं जा पाता है। उपचार नहीं होने पर गंभीर हो जाता है।

(2) गंभीर प्रकार :-  जब मध्यम प्रकार के वेरिकोज वेन्स रोग का उपचार नहीं किया जाता है तो यही गंभीर रूप में परिवर्तित हो जाता है और बहुत कष्टदायक हो जाता है। 

(3) स्पाइडर वेन्स :- इसमें नसें मकड़ी के जाले जैसी दिखने लगती है। इसे दूसरे शब्दों में पेड़ की शाखाओं जैसी भी कह सकते है। यह उपचार द्वारा बहुत आसानी से ठीक किया जा सकता है। 

(4) गर्भावस्था के दौरान होने वाले वेरिकोज वेन्स :- यह गर्भावस्था में ज्यादा खून के उत्पादन होने के कारण नसों में खून का दबाव बढ़ जाने के कारण हो जाता है , जो उपचार द्वारा ठीक हो जाता है। 

लक्षण :- पैरों में सूजन,मसल्स में ऐठन,स्किन पर अल्सर,नीली नसों का गुच्छा,पैरों में दर्द सूजन ,नसों में उभार,तलवे में दर्द,प्रभावित नसों में खुजली,पैरों में भारीपन महसूस होना,बहुत देर तक बैठने और उठने पर दर्द,मांसपेशियों में ऐंठन आदि वेरिकोज वेन्स रोग के प्रमुख लक्षण हैं। 

कारण : - आनुवांशिकता,हार्मोनल बदलाव,मोटापा,नसों में दबाव उत्पन्न होना,अधिक उम्र का होना,गर्भावस्था,बहुत देर तक एक ही अवस्था में रहना,हृदय के वाल्व का ठीक से कार्य न करना,गर्भनिरोधक गोलियों का अधिक प्रयोग करना,कब्ज,फ़ास्ट फ़ूड का अधिक प्रयोग आदि वेरिकोज वेन्स रोग के मुख्य कारण हैं। 

उपचार : - (1) लहसुन की 10 - 15 कलियों को पीसकर संतरे के जूस एवं दो चम्मच जैतून के तेल के साथ मिलाकर सोते समय मालिश करने से वेरिकोज वेन्स रोग ठीक हो जाता है। 

(2) गर्म दूध के साथ भुनी हुई लहसुन की कलियाँ  चार - पांच प्रतिदिन खाने से वेरिकोज वेन्स रोग ठीक हो जाता है। 

(3) अजमोद की थोड़ी सी पत्तियों को उबालें और उसमें तीन चार बूंद गुलाब का तेल ,तीन चार बून्द गेंदा के फूलों का तेल मिलाकर प्रभावित नसों पर लगाने से वेरिकोज वेन्स रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है। 

(4)सेब के सिरके का सुबह - शाम एक चम्मच सेवन पानी में मिलाकर करने से वेरिकोज वेन्स रोग में बहुत आराम होता है। 

(5) लाल शिमला मिर्च के पाउडर का एक या आधा चम्मच गर्म जल के साथ सेवन करने से वेरिकोज वेन्स रोग में बहुत आराम मिलता है। 

(6) जैतून तेल को हल्का गर्म कर नसों की मालिश से वेरिकोज वेन्स रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है। 

(7) अखरोट के तेल में सूती कपडे को भिंगो कर पट्टी बांधने से वेरिकोज वेन्स रोग ठीक हो जाता है। 

(8) जीवन शैली में परिवर्तन द्वारा जैसे ज्यादा देर तक खड़े नहीं रहना,वजन काम करना,नियमित व्यायाम करना,टाइट जुराबें पहनना आदि द्वारा वेरिकोज वेन्स रोग की परेशानियों को दूर किया जा सकता है। 

(9) ज्यादा फाइबर युक्त भोज्य पदार्थों के सेवन द्वारा भी वेरिकोज वेन्स रोग से बचा जा सकता है। 

(10) मड पैक थेरेपी द्वारा भी वेरिकोज वेन्स रोग को दूर किया जा सकता है। 

उपयोगी योग,आसन एवं व्यायाम : - अनुलोम - विलोम,सूर्य नमस्कार, शीर्षासन,नौकासन,सर्वांगासन,उत्तानपादासन,सूक्ष्म व्यायाम आदि वेरिकोज वेन्स रोग में अत्यंत लाभप्रद हैं। 


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